Sunday, 5 July 2020

पुलिस घर से उठा ले गई और पैर तोड़ कर सदर में भारती कर दिया, बताया भी नहीं मेरा अपराध क्या था ?



मै शंकर साव पिता उम्र 32 श्री लक्ष्मण साव ग्राम तीन तारा पोस्ट कोडरमा जिला कोडरमा राज्य झारखण्ड का मूल निवासी हु!

मेरे परिवार में मेरे मेरी पत्नी के साथ मेरे 2 बच्चे लड़का के साथ भरा पूरा परिवार है! हम कोडरमा चौक पर फल का गुमटी लगाते है और किसी तरह अपने परिवार का जीविका चलाते है!

मेरी घटना यह है 28 जनवरी को शाम में मेरे दोस्त लोग हमें घर छोड़ दिए थे! मूर्ति विसर्जन के बाद  और घर आने के बाद हम खाना खाने बैठे ही थे  की तभी पुलिस की एक गाडी मेरे घर आया हम एक ही रोटी खाए और हाथ धो कर पुलिस के साथ चल दिए वो लोग हमें कोडरमा थाना ले गया वहा उतरने के बाद वो लोग के अलाव में हाथ सेकने लगा और हम बाथरुम के लिए गए उसके बाद हमको कुछ होश नहीं की मेरे साथ क्या हुआ?

 अचानक हमको कोडरमा सादर अस्पताल में दुसरे दिन 7 बजे सुबह हमको होश आया तो मेरे बगल में एक चौकीदार बैठा हुआ था! हम पेशाब जाने के लिए उठने लगे तो बहुत जोर से पैर में दर्द हुआ उसके बाद फिर हमारे सीने में भी दर्द महसूस हुआ! और पुरे शारीर में दर्द होने लगा उसके बाद हम उससे पूछे की हम यहाँ कैसे आये! इस बात पर वो बोला की तुम हमसे मिलने आ रहा था इस बिच तुम नाली में गिर गया! हम भी सोचने लगे की हम नशा में थे तो अगर कही गिर जायेंगे तो पूरा शारीर में दर्द कैसे हो जायेगा? फिर हम परेशान हो गए! कुछ देर बाद मेरे मम्मी पापा लोग अस्पताल पहुचे तब तक चौकीदार वहा से फरार हो गया था किसी पुलिस वाले ने हमें देखने नहीं गया! जब सदर अस्पताल में एक्सरे करवाने गए तो वहा का मशीन ख़राब था जिस कारन हमारा एक्सरे नहीं हुआ! उसके बाद सदर अस्पताल से पर्ची कटवा लिए और कोडरमा के निजी क्लिनिक में इलाज करवाने जाने लगे तो पापा के पास पैसा नहीं था घर में सबका रो रो कर बुरा हाल था यह सब देख कर मेरा भी आत्मा फट गया और हम दिल ही दिल में रोने लगे पापा पैसा के जुगाड़ में चले गए मेरी पत्नी को होश ही नहीं था की क्या हुआ वो हर बार एक ही बात बोल रही थी मेरा पति निर्दोष है वो कुछ नहीं किया है! पापा किसी तरह 20,000 रुपया कर्ज कर के हमें निजी क्लिनिक में भर्ती कराये जहा से ईलाज होने के बाद हमें दुसरे दिन धनबाद रेफर कर दिया गया जहा मेरा इलाज 15 दिन बाद हुआ मेरी माँ मेरे साथ रही उन 15 दिनों में माँ के ऊपर मुसीबत का पहाड़ टूट गया था! वो बार बार रोने लगती थी! उनका भी तबियत ख़राब हो गया था! पर क्या कर सकते थे माँ को बस यही बोल कर हिम्मत देते थे की क्या करोगी जो होना था हो गया अब क्या करे! इस तरह 15 दिन तक माँ भी खाना पीना छोड़ कर मेरे सेवा में लगी रही!

कुछ दिन बाद हमको पता चला की मेरे गाँव में एक आदमी का हत्या हो गया था उसी मामले में पूछ ताछ के लिए ले गया था! पर हम बार बार यही ख्याल आ रहा है की आखिर पुलिस मेरे साथ ऐसा क्या पुच ताछ किया की हम अस्पताल में चले गए!

हम चाहते है की मेरे साथ इस तरह की घटना घटी उसके लिए जिम्मेवार कौन है और हमें जब पुलिस घर से ले गई तो हमें सुरक्षित घर क्यों नहीं छोड़ा! 

हम चाहते है इस मामले में हमें न्याय मिले और जो भी दोषी हो उस पर कौनी कार्यवाही की जाए!



                                                   

जब भी पुलिस के पास जाता हूँ वह बहाना बना देती है!


मै संजय साव हूँ मेरी उम्र 35 वर्ष है  मेरे पिता दासो साव है मै ग्राम – बिघा, पोस्ट – फुलवरिया, थाना – नवलशाही, जिला – कोडरमा का मूल निवासी हूँ 
मेरी घटना यह है की मेरा गोतिया कैलाश साव पिता छोटी साव जिससे छ: महीने पहले जमीन जिसका खाता सं० (79) प्लाट सं० (113) है  जो खतियान में मेरे दादा स्व० बलकरण नायक के नाम से दर्ज है  जिसमे मेरा और मेरे गोतिया का बराबर का हिस्सा है  जब मेरा गोतिया उस जमीन पर घर बनाने लगा तो हम उस जमीन पर बटवारे का फैसला बैठाये, कैलाश साव जमीन का बटवारा बराबर के हिस्से में नही देना चाह रहा था  वह जमीन का पिछला हिस्सा मुझे दे  रहा था  मैंने गोतिया से कहा की आगे से पीछे बराबर का हिस्सा हमे दीजिये इस पर वह तैयार नही हुआ तो हमे कानून का सहारा लेना पड़ा  उस जमीन पर 144 की धारा लगी थी फिर भी वो लोग जबरन उस जमीन पर घर बनवाने लगे | 25 मई 2018 को मेरे पिताजी जब उन लोगो से मना करने गये की बटवारा होने के बाद घर बनवाना तो कैलाश, छोटी साव, सुशांत साव और पत्नी पिंकी देवी जो मेरे पिताजी को डंडे से बुरी तरह मानने लगे जब वो चिल्लाने लगे उनकी आवाज सुनकर मेरी बहन सरिता देवी जो ससुराल में परेशानी रहने के कारण यही रहती है | वो दौडकर उन्हें बचाने आयी उन सभी ने मिलकर मेरी बहन की भी जमकर पिटाई की उसका एक हाथ तोड़ दिया जब यह घटना घटी हम लोग वहा नही थे | यह सारी बाते मेरी माँ ने मुझे फ़ोन पर बतायी यह सुनकर मै जल्दी वहा गया तो मेरे पिताजी बेहोश पड़े थे मेरी बहन उनका हाथ पकड़कर रो रही थी यह देखकर मै घबरा गया की कही मेरे पिताजी को कुछ हो तो नही गया हमे उस समय बहुत तेज गुस्सा भी आ रहा था |
मै उस समय अपने को सम्भालते हुए जैसे उनको उठाने के लिए झुका वह लोग मुझे पकड़कर बारी – बारी डंडे से मारने लगे मेरे सिर पर कैलाश साव ने पीछे से धारदार हथियार से वॉर किया जिससे मेरा माथा दो जगह फट गया उस समय मेरी आँखों के सामने अँधेरा छा गया और मै बेहोस हो गया | मुझे कुछ देर बाद जब होस आया तो मेरे चारो ओर खून फैला हुआ था उस समय सभी खड़े हो कर तमाशा देख रहे थे हिम्मत कर किसी तरह मै पिता को लेकर खून
 से लतफथ नवलशाही थाने गये पुलिस को घटना की सारी जानकारी दी गयी वहा से पुलिस ने मेडिकल के लिए फुलवरिया उप स्वास्थ्य केंद्र के लिए एक चौकीदार हमे ले कर गया वह डॉक्टर नही मिला फिर हमे डोमचाच के अस्पताल में ले जाया गया वहा पर डॉक्टर पी मिश्रा बोले की यह का इन्जोरी नही कटा है इसलिए हम इलाज नही करेगे हम लोग खून से लतफथ दर्द से कराह रहे थे | 
उस समय हमे बहुत तकलीफ हुई की मै अपने बाप का इलाज भी नही करा पा रहा हूँ | जब डॉक्टर और पुलिस में बात हुआ तब हमारा इलाज हुआ |वहा से इलाज के बाद हमे फुलवरिया ले जाया गया वहा न के सफाई कर्मी ने मेरी पट्टी खोलकर फिर से वही पट्टी बांध दिया उसके बाद हम लोग को पुलिस थाने ले आयी और वहा से हमे यह कहकर घर भेज दिया आप लोग शाम को आइयेगा और जब हम लोग घर आये तो देखे की यहा पर उन लोगो ने मेरे माँ बहन को फिर इतनी बुरी तरह मारा की वह बेहोश हो गयी यह देख घबरा कर मै उन्हें थाने ले गया वहा से उन्हें मेडिकल कराने के लिए भेजा गया लेकिन कोई उपचार न मेडिकल मुआवना नही हुआ मै थक हार के वापस घर चला आया उन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही हुई | जब भी पुलिस के पास जाता हूँ तो वह बहाना बना देती है हम लोगो से ठीक तरह से बात नही करती है | आज भी वह लोग धमकी देते है फिर से मारेंगे देखते है क्या करोगे | दिन रात चिंता लगी रहती है कही जाता हूँ तो घर की चिंता लगी रहती है हमेशा जी घबराता है |डर बना रहता है क्या करू कुछ समझ में नही आ रहा है | जब से यह घटना हुई है पेट भर खाना नसीब नही हुआ है पूरी नीद सो भी नही पाया हूँ |
   मै चाहता हूँ जिन लोगो ने मेरे साथ ऐसा किया है उनके खिलाफ कार्यवाही की जाय और हमे हमारा हक मिले |

बेटी के साथ हुए छेड छाड मामले में थाने में प्राथमिकी कराने गई महिला को पुलिस ने कहा: चली आती है थाना जैसे बाबा का दरबार है।



मै शोभा देवी उम्र 35 पति स्व0 अनिल मिश्रा ग्राम नयाटांड पोस्ट कोडरमा थाना कोडरमा जिला झारखण्ड की मूल निवासी हू। मै और मेरा परिवार खुला मैदान मे तम्बू (प्लास्टिक का झोपडी) बना कर रहते है। और गुजर बसर के लिए चुडी, और मनिहारी सामान गाॅव गाॅव जा कर बेचते है। मै और मेरा परिवार पिछले 40 साालों से कोडरमा में रह कर यह काम कर रहे है।
मेरे साथ घटना यह घटी कि 26 नवम्बर की षाम 3 बजे मेरी बेटी उमा (काल्पनिक नाम ) उम्र 13 वर्ष  चुडी बेच कर आ रही थी। उसके रास्ते मे पहले से ताक लगाये बैठे छोटू उर्फ कोका पिता नन्हका मियाॅ ग्राम जलवाबाद हेठ टोला वार्ड नम्बर 11 का था जो मेरी बेटी को छेडने की कोशिश किया और अपषब्द बोले तो मेरी बेटी जल्दी से भाग कर आई और हमको कह सुनाई। हम गरिब लोग कुछ बोलने नही गये। कुछ देर बाद 6 बजे षाम को मेरी बेटी टट्टी षौच कार्य के लिए गई तो उस लडके ने झाडी से निकल कर उसको जोर से पकड लिया और उसके बदन के कपडे फाड कर उसे पटक दिया वो जोर से चिल्लाई उसका आवाज सुन कर हम और मेरे आस पडोस के लोग तुरंत दौड कर वहाॅ गये तो उस लडके के साथ हाथा पाई हो गया। उस लडके ने और लोगों को बुला लिया उसके बाद उन लागों ने हमलोगों को पटक पटक कर बहुत मारा मै खुब चिल्ला रही थी कोई बचाने वाला नही था लोग खडा हो कर देख रहे थे। अषोक मिश्रा उर्फ बिठला ने धारदार हथियार से मेरे माथा पर मारा जिससे मेरा माथा फट कर पुरा जोर से खुन बाहर आने लगा हम धबरा गये हमे लगने लगा कि अब हम नही बचेगें। मेरी बेटी मनिषा हमको देख कर जोर जोर से चिल्ला चिल्ला कर रोने लगी। फिर हम थाना गये तो थाने वाले पुलिस ने यह कह कर भगा दिया कि ये लोग खुद मार पीट कर थाना चले आते है। जैसे बाबा का दरबार है। कुछ नही हुआ है ये लोग झुठ बोल रहे है। हम बोलते रहे कि सर लडका लोग मेरी बेटी को छेडा और रेप करने की कोषिष की पर किसी ने मेरी एक नही सुनी। अंत मे निराष हो कर लौट रहे थे रास्ते मे निरा दीदी का घर दिखा तो वहाॅ मिलना चाहे पर वो नही थी फिर फोन पर बात हुआ तो उसके आदमी हमको थाना ले कर गये और केस करवा दिये। पर वो लोग थ्या लिखा क्या नही हमको कुछ पता नही। वो लडका लोग को पुलिस ले कर थाना आया था फिर मेरे साथ मे ही वो लोग को भी छोड दिया। दुसरे दिन वो लोग 8 से 10 लोग आये और मेरे साथ साथ और भी मेरे जैसे जितने रहने वाले थे सभी का झोपडी लाठी डंटा और टाॅगी से तोड फोड कर उजाड दिये कुल चार परिवार के 18 लागों को उन लोगों ने बेघर कर दिया हम लोग उन लागों के पैर पकडे कि हमें यहाॅ से नही भगाईये पर उनलागों ने बोला कि हमारे महलले मे रह कर हमारे लडके लोगों को बदनाम करेगी भागो यहाॅ से। अंत में हमलागों को भागना पडा। अभी वहाॅ से कुछ दूरी पर रह रहे है। पर वो लोग मार परट करने की घमकी देता है। और पुलिस मेरी बेटी के साथ हुए छेड छाड और मार पीट पर कोर्द कार्य वाही नही कर रही है।
हमलागों का डर से बुरा हाल है। कि कब जाने वो लोग क्या कर देगे? हम चाहते है। कि पुलिस मेरे मामले मे जाॅच पडताल कर के दोषियों के उपर कडी कार्यवाही कर हमें न्याय दे। क्या हमलोगांे के लिए कानून नही बना है। जो पुलिस इस तरह हमे थाना से भगा देती है। एैसे पुलिस वाले पर भी कानून कार्यवाही करे ताकि आाने वाले किसी गरीब को थाने मे ईज्जत से बात करे और उसके दर्द को पुलिस समझे। इसके सिवा हमको कुछ नही चाहिए। 
आप लोग मेरी बात सुन रहे है। हमें लग रहा है कि अब हमें न्याय मिलेगा। ईस तरह किसी ने मेरी बात नही सुनी अगर पुलिस वाले सुनते तो हमें कब का न्याय मिल जाता। 


पैसा ले कर मुख्य आरोपी का नाम हटा: पैसे का रखैल बन गया पुलिस



मै  सुमन कुमार ( काल्पनिक नाम ) पिता स्व0 (रामू  प्रसाद) काल्पनिक नाम  ग्राम गिरीडीह रोड डोमचाॅच कोडरमा झारखण्ड का मूल निवासी हू।
छः सदस्यों का मेरा परिवार पुरी तरह खुषहाल था मेरा अपना राशन का दुकान है। जिसमे मै दिन रात मेंहनत करता हु। इसी से मेरा परिवार का अजीविका चलता है।! अचानक 9 मई 2015 को मेरे दुकान के सामने एक सडक दुर्धटना हुआ।! एक बाईक पर पुरा परिवार पति पत्नी और बच्चे जा रहे थे विपरित दिशा से आ रहे दस चक्का ट्रक की चपेट मे आने से महीला की मौत हो गई। मै देखा तो अपने घर से कपडा ले जा कर महिला के उपर डाल दिया! और अपने दुकान में आ कर काम करने लगें कुछ ही धंटों में वहाॅ इतना भीड लग गया और हमें लगा कि माहौल खराब हो सकता है। तो हम दुकान बंद कर के घर के काम में हाॅथ बटाने चले गये।! प्ुलिस मेरे घर के पास आई तो हम उसे बैठने के लिए कुर्सी दिये और पानी पीलाये और जहाॅ तक हमसे हो सका हम पुलिस को मदद किये! क्योकि मेरे परिवार के लोग भी पुलिस में थे तो बताते थे कि उन्हे किस तरह से कानून के लिए काम करना पडता है। इस लिए हम उन्हे पुरा मदद किये! मेरे पेडोस के लोग भी पुलिस के मदद किये पुलिस रात 2 बजे तक काम किया और फिर चला गया
दुसरे दिन पास पडोस के लोगों से हमें पता चला कि हमारे उपर केस हो गया है।! यह सुन कर तो मेरे पैर तले जमीन खिसक गई हमें बहुत तकलीफ हुआ इस बात का कि पुलिस को पुरा रात सर सर कर उनको पानी पिलाये बैठने को दिये और जहाॅ तक हुआ पुरा मदद किये जिसका ये सिला मिला ईस तरह होने लगे तो मै क्या कोई भी कानून का मदद करने से डरेगा ! तब से मै काफी विचलित रहने लगा था। घर परिवार में बच्चे और पत्नी बहुत परेषान रहने लगी थी और हम अपने परिवार की चिंता को देखते हुए मुखिया वार्ड सदस्य स ेले कर मंत्री तक हाॅथ जोडे और पुरा मामला सुनाये सबने मदद करने की बात कही पर किसी ने मेरा मदद नही किया! पर सभी ने कहा कि पुलिस आनके साथ गलत किया है। इस 10 से 15 दिन में मेरा काफी नुकषान हुआ था दुकान बंद होने के कारण घर में खाने की समस्या तक आ गई थी और हम कर्ज में डुब गये! हम पुरी तरह हताष हो गये थे मेरा हिम्मत नही काम कर रहा था।! टाज तक मेरे उपर किसी भी तरहा का कोई अपराधिक मुकदमा नही था और पुलिस जान बुझ कर हमें फंसा रही थी।।! मेरे अलावे 17 और लोगों का नाम था इस केस में जो बडे पंुजीपति थे और पुरी घटना का जो मुख्य आरोपी दीपक कुमार अग्रवाल जो काफी पैसा वाला है। पुलिस उससे पैसा लेकर उस पर लगे सभी धारा को हटा कर इस केस से उसे मुक्त कर दिया! जब हमें यह पता चला तो लगा कि कानून और पुलिस पैसे का रखैल बन गया है।! इस देष में गरिब को न्याय के लिए कोइ जगह नही है।! जहाॅ पैसा है वहाॅ सबकुछ होता है।! उसके बाद हमें लगा कि पुलिस से हमें मिलना चाहिए यह सोंच कर हम एक दिन डोमचाॅच थाना गये और थाना के बडा बाबु सुधीर कुमार पोद्दार का पैर पकड कर खुब रोये और बोले कर आपको पानी पिलाना ही मेरा दोश है। और हमने कोइ दोश नही किया है! ळम तो आपको मदद किये और आप मेरे साथ इतना बुरा किजिएगा ऐ हमें पता नही था! जे मामले में मुख्य आरोपी था उसका नाम हटा दिये और मेरा रहने दिये! थाना प्रभारी हमको देखा और बोला ठीक है रो मतह म तुम्हे मदद करेगें हम जानते है तुम गलती नही किये हो पर कानून होता है। ना! वे ऐसे बोला मानो मेरा भगवान आज सामने प्रकट हो कर ये वरदान दे रहे हो हमको एैसा लग रहा था मेरा दिल का बोझ कुछ हल्का लग रहा था।  हम घर आये और बच्चों व परिवार को बताये तो उनलोगों के हलक से खाना उतरा और उस दिन मेरा परिवार ठीक से खाना ख पाया था यह देख कर हमें थोडा खुषी हुआ पर दिल में डर बना हुआ था।!
ईसके बाद हम थाना के आई0 ओ0 महेन्द्र यादव से बात किये तो वो बोला कि आप इस केष में किसी भी रुप में दोशी नही है। और  आप पर कोइ कार्यवाही नही होगा इसी बीच वो ट्रांसफर हो गया उसके बाद वो रिटायर हो गया! दुसरा आई0 ओ0 ने फिर हमें इस केस में फसा दिया ! इस तरह हम इस घटना सं पुरी तरह टुट गया हूॅ! टब हमें न्याय की उम्मीद नही दिख रही है।
इस घटना सं हमे न्याय चाहिए और कानून मुख्य आरोपी पर कानूनी कार्यवाही करे हम यही चाहते है। कि किसी गरिब का कानून के प्रति विष्वास न टूटे!


बलात्कार होने के बाद पुलिस से शिकायत की, नही हुई कार्यवाही, गावँ छोड़ दिये


भारत के संविधान में लोगों को मान सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार निहित है। भारत के वर्षों पुराने इतिहास में गुलामी प्रथा था, पर आजाद  भारत में भी भारतीय संविधान के द्वारा अनुच्छेद 21 का उल्घंन ईट भट्ठो, कल कारखानों के मजदुरो के साथ आम बात है। गुलामी की कहानी पीड़ित गीता की जुबानी।
मै गीता देवी उम्र-40 वर्ष पति कामेश्वर माझी ग्राम-सरबदाय, पोस्ट-सरवदाय, थाना-फतेहपुर, जिला-गया बिहार की मूल निवासिनी हूँ।
मेरी घटना यह है कि मेरा जीवन अच्छा खासा गुजर रहा था। मेरे पाँच बच्चें हैै, मैं अपने पति के साथ ईट के भट्ठे पर काम करने जाती थी। हम कई जगह ईट के भट्ठे पर काम किये लेकिन मेरे साथ ऐसा नही हुआ। जैसा हम अपने ही गाँव में रामाशीश यादव बेटा दिलीप यादव के भट्ठे पर काम करने के दौरान हुआ। हम उसके भट्ठे पर काम करने जाने लगे काम करते लेकिन वो पैसा नही देता हम उसको एक दिन बोले की हमलोग आपके भट्ठे पर काम नही करेगेें। आप पैसा नही देते है। उसी दिन वो मेरे घर आया और 2000/- दो हजार रुपया देने लगा। हम पैसा नही लिये। क्योंकि हमलोग का ज्यादा पैसा निकल रहा था। हम मना किये लेकिन वो नही माना और कहने लगा की अब पैसा नही होगा और बोला की मेरा कोटा (राशन डीलर) का दुकान है, वही से चावल ले आना तो फिर हम पैसा ले लिए उसके बाद हम दोनो पति पत्नी उसके भट्ठे पर काम करने लाने लगे हम उसके भट्ठे पर तीन साल काम किये लेकिन वो एक पैसा नही दिया। उसके दुकान में जो भी सडा-खराब अनाज होता वही दे देता था। हम उसको फिर एक दिन बोले की मेरी बेटी बड़ी हो गयी है। हमको बेटी का शादी करना है तो वो बोला की ठीक है, तुम अपनी बेटी का शादी तय करो जितना लगेगा उतना हम पैसा दे देगे। हम उसको कहने पर अपनी बेटी का शादी तय कर दिये जब शादी तय हो गया, हम उससे पैसा मांगे तो वो नही दिया हम परेशान हो गये। हमको पागल जैसा लग रहा था कि अब क्या करे कहा से पैसा लाए तो फिर हम शुद्ध (ब्याज) पर पैसा उठाये और अपनी दोनों बेटियों का शादी किये। उसके बाद हम उससे फिर पैसा मांगे तो वो नही दिया हम उसको बोले की हम कर्जा उठा कर अपनी बेटी का शादी किये है वो हमसे पैसा मांग रहा है। आप हमको पैसर दिजीए या फिर हम आपके यहां काम नही करेगे तो वो एक दम चिल्ला कर बोला की तुम लोग चुप चाप काम करो क्योंकि मेरा ही पैसर तुम्हारे पास बाकी है। काम करो और पैसा वसुल करो जब हम उसको पुछे की कैसे पैसा निकलेगा तो वो उल्टा पल्टा बता दिया और चला गया हम और मेरे पति फिर वही काम करने लगे तो एक दिन अचानाक मेरे पति के हाथ में दर्द हो गया वो उस दिन काम पर नही गये तो उसको दुसरे दिन रामशीश यादव बेटा दिलीप यादव मेरे घर आया और बोला की तुम्हारा पति काम पर क्यों नही गया तो मेरे पति बोले की हाथ में दर्द हो गया था। इस लिये काम पर नही गये तो वो गाली देने लगा शाला भोसडी मार कर काट देंगे बहाना करता है। चुप चाप काम करो नही तो ठीक नही होगा हम उस दिन खाना नही बनाए सारा दिन चिन्ता में बेठे रहे की ना जाने वो क्या कर देगा मेरे पति के साथ हम उसको बोले की हम शुद पर पैसा उठा कर तुमको दे देते है। जितना पैसा तुम्हारा निकलता है। तो वो बोला की हमको पैसा नही चाहिए तुमलोग काम करो उसके बाद मेरे पति बोले की हम आठ दिन से लिए कही जा रहे है। जब हाथ ठीक हो जाएगा तो चले आऐगें मेरे पति वहां से कोडरमा चले आए उसके बाद वो हमको लगातार धमकाने लगा की तुम्हारा पति कहा है। उसको जान मार देगे और मेरा सारा पैसा वसुल करोगी। हम कुछ नही बोले उसके बाद एक दिन हम बाजार से आ रहे थे तो वो मेरे सामने गाड़ी लाकर रोक दिया और बोला साली भोसड़ी गाड़ी पर बैठो और चलो हम तुमको जान से मार देगे हम उसको बोले की हम तुम्मारा पैसा काम कर के वसुल कर देगे तो वो गाली देकर बोला की साली मेरे साथ हम तुम्हारा इज्जत लुट कर तुमको मार देगे और जबरदस्ती गाड़ी में बैठाने लगा उस समय मेरा पुरा बदन काप रहा था, लगा रहा था काटो तो खुन नही इतने में वही से मेरा चेचरा देवर ललन गुजर रहा था वो बोला की तुम इसके साथ ऐसा क्यों कर रहे हो तो वो बोला की इससे पैसा वसुलना है तो ललन बोला ठीक है। कमा करके वसुल कर देगी और वो मुझे अपनी गाड़ी पर बेठा कर वहां से लेकर चल आया मेरे लिए वो भगवान से भेजा हुआ फरीसता था। जिसके कारण मेरी जान और मेरी इज्जत जाते-जाते बची उसके बाद हमको उस आदमी से बहुत डर हो गया हम अपने दोनों बच्चों को लेकर अपना घर दुवार छोड़ कर उसके डर से वहा से भाग कर यहा कोडरमा आ गये हमको यहां आए एक वर्ष हो गया है। हम अपने पति के साथ यहा भी ईट के भट्ठे मंें काम करते है। मेरे दोनों बच्चों का पढ़ाई बर्वाद हो रहा है। उस इन्सान के चलते मेरा हँसता-खेलता परिवार परेशान है।
हम चाहते है हमको हक मिले और उसको उसके किये की सजा मिले ताकि फिर कोई इन्सान किसी गरीब महिला के साथ ऐसा ना करे।

  इस केस की अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे  sangram.jharkhand05@gmail.com

Friday, 1 July 2011

समाज की कलंक बन गई हूँ, जब डायन की उपाधि मिली’’




मैं सावित्री देवी, उम्र-50 वर्ष है। मेरे पति का नाम स्व0 द्वारिका दास है। मैं ग्राम-नावाडीह, पोस्ट-डोमचाॅच, थाना-डोमचाॅच, जिला-कोडरमा की मूल निवासी हूँ।

मेरी घटना उन दिनों कि है जब हमारी शादी होकर घर आई और लोग हमे प्रजापति करने लगे। मैं तब से लाचार हुई जब हम अपनी पवित्रता को बरकरार रखती थी, किसी के यहाॅ खाना-पीना नही खाती थी और न ही किसी के यहाॅ का दिया गया कोई बनाया सामान खाती थी। इस कारण हमारे घर के पड़ोसी हमे डायन कहने लगे और तब से यह सिलसिला शुरू हुआ, सो अब तक चल रहा है। हद तो तब हो गई जब वर्ष 2009 के माघ महीने में जब हमारे भसूर कार्तिक दास का बेटा सरोज दास, जो 25 वर्ष का था। वो (तिलैया) कोडरमा रेलवे स्टेशन का रेलवे क्रासिंग पार कर रहा था और अचानक ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई तो हमारे भसूर व गोतिया वालों ने ये आरोप लगाया कि यही मेरा बेटा को खा गई। इस कारण झगड़ा हो गया। झगड़े में वो सब हमे मारने तक उतारू हो गये। ग्रामीणों ने कहा कि इस बात को साबित किया जाय कि ये डायन है। इस बात को लेकर टनकुप्पा, गया जिला (बिहार) से भगत लाया गया। भगत ने मेरे गोतिया के घर में आॅटा, सिंदुर, रोरी से गोल चक्का बनाया। चक्के के बीच में एक चक्का जाॅत (जिससे गेहू/मकई दर्रा जाता है) रखा उस पर हमें बैठाकर सामने एक लोटा पानी रख दिया, पानी मंे आग लग गया। इस पर उसने कहा कि तुम डायन हो। यह कहकर मेरे पीठ पर एक झापड़ मारा और एक कबुतर काट कर दो बूॅद खून मेरे ऊपर गिरा दिया। इसके बाद मेरा आँचल जला दिया। इस काम को देखकर मेरी बेटी भगत पर गुस्सा की तो वो डाॅटा और भरी सभा-समाज के बीच मेरी बेटी को भी डायन कहकर प्रताड़ित किया और कई अपशब्द कहा, जो मैं नही कह सकती। भगत ने पुरे समाज के बीच यह भी कहा कि आप लोग कहिएगा तो हम इस औरत को जला देगें, लेकिन मेरे ऊपर केस नही होना चाहिए। तब हमारे गोतिया और खडे़ होकर देख रहे लोगों ने कुछ भी नही कहा। मेरी बेटी बोली अगर मेरी माॅ डायन है तो जला दो और इतना कहकर वो फुट-फुट कर रोने लगी। यह सब देखकर मैं भी रो पड़ी, मंै यह सोच रही थी कि मेरा एक ही 2 द्य च् ं ह म

बेटा है। भगवान मेरे बेटे को ठीक से रखना। मैं भी रो रही थी और मेरी बेटी भी, लेकिन वहाॅ खड़े सैकड़ो लोग में किसी ने कुछ नही कहा। यह देखकर मेरी आत्मा और रो पड़ी। मैं अंदर से टूट गई। मेरे अंदर उस समय जान नही रहा, लेकिन बेटे के ख्याल ने हमें हिम्मत दिया। इस बात को लेकर हम फैसला भी करवाये, कई राजनीति दल के लोगों से गुहार लगाई कि हमें कोई न्याय दिलवाये, हमारे उपर लगा कलंक कोई मिटाये, लेकिन हमारा कोई नही सुना। आज भी हमें डायन कहा जाता है। हमारे गाॅव में किसी को कुछ होता है तो पुरा गोतिया सब हमें डायन कहके गाली गलौज करने लगते है। तब मेरी आत्मा रो जाती है। मैं डायन नही हूॅ यह साबित करने के लिये हमारे गोतिया जो बोले हम सब किये फिर भी हमे डायन कहते है। मैं अपने घर के आस-पास पेड़-पौधा लगाता हूॅ तो वो भी उखाड़ कर फेक देते है। यह सोचकर मै परेशान रहती हूॅ। साथ ही मेरे बेटा का बेटा जो मेरा पोती है उसे किसी बच्चों के साथ खेलने नही दिया जाता है। रात में पास पड़ोस के लोग घर में पत्थर मारते है। इस तरह मैं परेशान हूॅ। आपको अपनी सारी घटना सुनाकर हल्का महसूस कर रही हूॅ आज तक किसी ने इस तरह हमारी घटना को नही सुना है।

‘‘मेरा बेटा मारा गया, पुलिस अब तक मुजरिमों को गिरफ्तार नही किया’’





मेरा नाम विश्वनाथ मेहता, उम्र-45 वर्ष है। मेरे पिता का नाम स्व0 झरी मेहता है। मैं ग्राम-तेतरियाडीह, पोस्ट-डोमचाॅच, थाना-डोमचाॅच, जिला-कोडरमा का मूल निवासी हूँ।

घटना उन दिनों की है जब 26 जनवरी 2011 को पुरा देश गणतंत्र दिवस में झुम रहा था और मेरे घर मे मातम का आलम था। 26 जनवरी की सुबह जब पता चला कि खेत में किसी व्यक्ति का शव पड़ा हैं (जो पहचान में नही आ रहा था) लोेग उसे पहचानने जा रहे थे। हमें लगा कि हमें भी जाना चाहिए और हम चले गये जाकर देखें तो उसे हम भी नही पहचान सके, लेकिन लग रहा था कि वो मेरा बेटा है, क्योकि कपड़ा से हम थोड़ा पहचान पाये थे। हम रोने लगे, लेकिन गाॅव वालों ने कहा कि पहले तुम वहाॅ पता करो, जहाँ तुम्हारा बेटा काम करता था।

हम घर आकर पत्नी को वहाॅ भेजे (बबुन साव के पत्थर खद्यान पर पुरनाडीह में जहाॅ बेटा काम करता था) उसे वहाॅ कोई नही मिला, फिर मेरी पत्नी किसी के मोबाईल से बबनु साव को फोन करके पुछी कि भोला कहाॅ है? उसका जवाब था कि वेा शाम 5 बजे घर चला गया। मेरी पत्नी भी रोते-रोते घर आई। हमें विश्वास हो गया कि वो मेरा ही बेटा है। पुलिस खेत से लाश को उठाकर थाने ले गई। हम अपने भतीजा लालमोहन के साथ थाना गये और वहाॅ जाकर पहचाने तो मेरा ही बेटा था। जब यह बात आग की तरह शहर में फैला तो थाने मे हजारों की भीड़ जमा हो गई। सुबह लगभग 9 बजे थाने मे डी0एस0पी0 आये और थाने के बड़ा बाबू को बोले कि फिल्ड चलिए, घटना की जानकारी लेते है। थाने से दो गाड़ी पुलिस चली जिसमे डी0एस0पी0 और बड़ा बाबू पुलिस बल के साथ चले, हमे डी0एस0पी0 के गाड़ी में बैठाया गया और जहाॅ लाश फेका था, हम वहाॅ गये। वहाॅ जा कर डी0एस0पी0 ने निरीक्षण किया तो पाया की इसे यहाॅ नही मारा गया है, 20 फीट के बगल में ही घर है, लोग रहते है, तो यहाॅ कैसे मारा जा सकता है। फिर डी0एस0पी0 बबून साव के खद्यान जाने के लिए तैयार हुए, जहाॅ मेरा बेटा भोला काम करता था। 2 द्य च् ं ह म

क्ण्ैण्च्ण् बबुन साव के खद्यान पर पहुचे तो बबुन साव पहले से वहाॅ मौजूद था। क्ण्ैण्च्ण् पुछा बबुन साव कौन है? इस पर बबुन साव बोला हम है, सर कुर्सी का व्यवस्था नही है। यहाॅ खद्यान पर क्ण्ैण्च्ण् बोला कोई बात नही, पता चला है कि भोला मेहता आपके ही खद्यान में काम करता था। बबुन साव हाॅ करता था, क्ण्ैण्च्ण् बोले वो मारा गया और आप उसे देखने तक नही गये। बबुन साव-वो वहाॅ से शाम 5 बजे ही चला गया था। क्ण्ैण्च्ण्.तो फिर आपको पता चला, आप देखने क्यो नहीं गये।

बबुन साव-यहाॅ काम ज्यादा था, इसलिए नही जा सके। क्ण्ैण्च्ण्. खद्यान को देखा और पुछा खद्यान के बीच में मिट्टी कहाॅ से आया। बबुन साव-सर बैंकर बनाकर पत्थर तोड़वाते है, इसलिए मिट्टी गिरवाये है। उसके इस बात पर हमे लगा कि सब काम डोजर (मिट्टी उठाने का गाड़ी) करता हैं कि वे बैंकर किसलिए।

क् ैण्च्ण्. उसे बगल वाले रूम मे खद्यान में काम कर रहे सभी मजदूर एवं बबुन साव को लाये और सबसे पुछ-ताछ किया। हम क्ण्ैण्च्ण् के गाड़ी के पास बैठे थे, अन्दर से निकले पर तीन लोग को क्ण्ैण्च्ण् गाड़ी में बैठाया और वहाॅ से चल दिये। (बबुन साव और दो लोग थे) गाड़ी महेशपुर चैक पर पहुॅची तो क्ण्ैण्च्ण् अचानक बोलता है, विश्वनाथ जी आप अपना समधी का घर जानते है। हम बोले सर हम जानते है और जानेगें क्यों नही, वहाॅ बेटी दिये है तो क्ण्ैण्च्ण् बोला चलिए आपके समधी के घर चलते है। वहाॅ से सिमरिया गये, वहाॅ जाने पर मेरा समधी घर में नही था। कुछ देर में पहुॅचे तो क्ण्ैण्च्ण् उनसे बात किये, हम गाड़ी में ही थे और बबुन साव भी गाड़ी में ही थे क्ण्ैण्च्ण्. क्या बात करके निकले किसी को पता नही चला। अचानक क्ण्ैण्च्ण् के मोबाईल पर थाना से फोन आया कि भीड़ काफी है। जल्दी थाना पहुँचिये, भीड़ नही सम्भल रहा है। इस पर क्ण्ैण्च्ण् बोला हम तुरंत पहुॅच रहे है। तब तक तुम लोग सम्भालों। क्ण्ैण्च्ण् थाना पहुॅचकर बबुन साव और विजय साव को अंदर ले गये हमे बाहर ही छोड़ दिया। कुछ ही देर में हमारे समाज के लोग हमसे पुछे कि कही हस्ताक्षर किये है क्या? हम बोले कही नही किये हैं तो उसने एक कागज दिया और हमसे हस्ताक्षर करवा के अंदर दे दिया और वो लोग कह रहे थें कि इसी बात पर केस करना है और इसी के आधार पर लड़ना है। हमकों समझ में नही आ रहा था कि लड़ने का क्या आधार बना है, क्योंकि हम कम पढ़े लिखे थे। 3 द्य च् ं ह म

थाने के बड़ा बाबू से बात करके 26 तारीक के शाम को 5 बजे लाश घर ले आये और तब से मेरे घर परिवार वालों का रोना-धोना शुरू था, सो बंद होने का नाम ही नहीं ले रहा था। मेरी पत्नी बार-बार बेहोश हो जा रही थी।

दुसरे दिन घर में सबका हालत खराब था। हम अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक 2 बजे के लगभग बबुन साव के यहाॅ काम करने वाली एक औरत हमारे यहाॅ आई वो भी रोने लगी और रोते-रोते मेरी पत्नी को चुप कराई तब तक उसके मोबाईल पर बबुन साव का फोन आया और पुछा वहाॅ गई, तो बताई, हम यही है। बबुन साव बोला उसकी माॅ से बात करवावो, तो मेरी पत्नी को फोन देकर बोली कि बबुन साव कुछ बोल रहा है। (फोन स्पीकर पर करने पर) बबुन साव बोला कि जो हमसे गलती हुआ माफ कर दो, मेरा इज्जत रख दो, तुम्हारा ही रिश्ता परिवार से हम ज्यादा मानेंगे और देते लेते रहेंगे। वो इतना ही बोल पाया था कि हम फोन लेना चाहे, लेकिन वो तुरंत मेरी पत्नी के हाॅथ से मोबाईल लेकर फोन काट दी और तुरंत यहाॅ से चली गई।

हम लोग इंतजार मे थे कि कुछ निर्णय आयेगा, क्योंकि बबुन साव के खद्यान के पास इसी घटना को लेकर बैठक था और हमारे घर परिवार से भी कुछ लोग गये थे, लेकिन वहाॅ क्या हुआ हमे पता नही चला, इतना जानते है कि वहाॅ पुलिस पहुॅचा और हमारे दमाद को उठाकर चल दिया और उसे थाने में बंद कर दिया। हमलोग शाम को लगभग 3 बजे दाह संस्कार के लिए चले गये। क्रियाक्रम तक कुछ नही हुआ तो फिर हम समाज से बात किये, तो समाज जाकर बबुन साव के मकान निर्माण का काम रूकवा दिया। इस पर बबुन साव बोला आप जो कहिएगा, हम मानने के लिए तैयार है, बैठकर निर्णय ले लिजिए। इस बात पर हमारा समाज बोला दोनों तरफ से पाॅच-पाॅच आदमी बैठकर निर्णय किजिएगा, तीन से चार बार बैठक टलने पर पाॅचवी बार बैठक हुई। बैठक अशोक साव के घर में रखा गया। बबुन साव के तरफ से पच्चीस आदमी थे और मेरे तरफ से पाॅच आदमी। पंच ने हमसे पुछा कि आप क्या कहते हैं कहिए हम कहे कि मेरा बेटा पिछले तीन माह से 2000/- दो हजार रूपये पर इनके डोजर गाड़ी में काम करता था। जब भी घर आता था तो फोन करके और गाड़ी भेजकर बुला लेते थे, लेकिन उसदिन न ही बुलाने आये न कुछ किये। इससे हमे 4 द्य च् ं ह म

लगता है कि मेरा बेटा की खद्यान में ही मारकर, खेत में लाकर फेक दिये। इसके बाद मेरे घर एक औरत को भेजकर फोन पर इस तरह बोले। पंच उनसे पुछा कि जब आपको पता चला कि भोला मर गया तो आप देखने क्यों नही गये। इस बात पर बबुन साव बोला कि मेरा मुंशी का कोर्ट मे हाजरी था, तो वही गये थे। इस कारण नही जा सके (पंच बोला 26 जनवरी के दिन भी कोर्ट खुला रहता है क्या) इसी बात पर पुरा बहस हुआ और पंच गुस्सा हुए और अंतिम निर्णय यह निकला कि इक्यासी हजार (81,000/-) रूपया दे कर मामला खत्म किया जाये, लेकिन हमे सब चालीस हजार (40,000/-) रुपये देकर यह बोल दिया गया कि केस खत्म होने पर पैसा देंगे। हम मन को मरोड़कर रह गये, क्या करते वो पैसा वाले लोग है उनके सामने हमारी क्या किमत है। जब मेरा दामाद जेल से छूटा तो उससे बात करने पर वो बताया कि 25 तारीक के शाम को मेरा मोबाईल पर भोला के मोबाईल से फोन गया कि तुम और हम वहाॅ गये, तो बबुन साव शराब पिलाया और इसके मरने की बात बताई, हमें गाड़ी में बैठाया गया और फिर कहाॅ-कहाॅ ले गया होश नही था। पुलिस हमे लेकर फिर खदान गया था, अंदर मे उसे दो तीन जगह खुन के छिटे दिखे पर वो फिर हमे गाड़ी मे बैठाकर थाना ले गया था। यह सब सुनकर मैं अधमरा हो गया, न कुछ कर पाता हूॅ और न घर का खर्च चला पता हूँ।

मेरी हालत इतनी खराब हो गई है, कि मैं क्या कहूॅ आपकों। आज हमे लग रहा है कि आप यह सब जान और सुनकर हमारे लिए कुछ करियेगा और हमें उम्मीद जगी है और हमे न्याय मिलेगा।