Showing posts with label Police Case. Show all posts
Showing posts with label Police Case. Show all posts

Monday, 21 June 2021

पुलिस ने जबरन लिखवाया प्राथमिकी के लिए आवेदन हम बोले लिख नहीं सकते, आप लिख दीजिए, परन्तु नहीं लिखा |


                                                                      मनोज कुमार 

मै मनोज कुमार उम्र 45 वर्ष पिता मेघलाल साव ग्राम भीमेडीह पोस्ट नवलशाही थाना नवलशाही जिला कोडरमा झारखण्ड का मूल निवासी हूँ | मेरे परिवार में मेरी पत्नी के साथ दो बच्चे और मेरे माता-पिता रहते है | हम ड्राइवर है, गाडी चलने का काम करते है |

 

मेरा घर परिवार खुशाल था हम चन्द रुपया ही कमाते थे जिससे घर परिवार का जीविका चल सके और अच्छे से रह रहे थे मेरे बच्चे गाँव के ही सरकारी स्कुल में पढाई करते है |

 

मेरे साथ अचानक से एक हादसा हो गया जिसका हमें तनिक भी एहसास नहीं था, की हमारे साथ ऐसा भी कुछ होगा ? मेरे घर के बगल में रहने वाले बालो साव और टेकलाल साव जो दोनों मेरे पडोसी है इन दोनों के साथ मेरा अच्छा रिश्ता था हमलोग एक थाली में खाने वाले थे परन्तु इस परिवार के साथ मेरा विवाद तब बढ़ गया जब वह घर बनाने लगा तो वह जबरन मेरे जमीन पर घर बना रहा था हम उसे मना किये बोले आप अमीन ला कर नापी करवा लीजिये जिसको ले कर हम 28 मई 2021 को नवलशाही थाना में आवेद दिए थे, और थाना वाला आ कर मना कर के गया था, परन्तु वो दोनों भाई जबरन बनाने लगे जिसे ले कर 29 मई 2021 के शाम को मेरे पिता जी उनलोगों को काम करने के लिए मना किये परन्तु वो लोग नहीं माने और गाली गलौज पर उतर आये और ईटा पत्थर चलाने लगे जिसके बाद हमलोग 29 के शाम को थाना जा कर इसकी सुचना दिए और पूरा धटना बताये, थाना वाले बोले सुबह में आ कर रुकवा देंगे | उसके बाद मेरे पिता जी साथ ही आये अन्य लोग थाना से घर चले आये 30 मई सुबह को हम घर आये जिसके बाद हम 30 मई 2021 को ही उसको पूछने गए की आप मेरे घर में गाली गलौज क्यों किया ? आपने अमीन ला कर नापी करवाने की बात की थी तो आपने क्यों नहीं किया? इतना पूछ ताछ करते ही थे की तभी महेंद्र साव टांगी से मेरे सर पर वार कर दिया हम तुरंत वही गिर गए तभी मेरी पत्नी यह देख कर चिल्लाते हुए वहा गई तो मेरी पत्नी को डालो साव रॉड से मार दिया वह भी घायल हो गर जमीन पर गिर गई, जिसके बाद मेरे पिता जी देख कर चिल्ला कर दौड़े तो उसे भी नारायण साव मार कर घायल कर दिया, मेरी बहन को भी उनलोगों ने टांगी से मार कर घायल कर दिया, जिसके बाद मेरे भांजे को मार कर उसके दाहिने हाथ का ऊँगली तोड़ दिया जिसके बाद हमें होश आया मेरे भगिना हमें और मेरी पत्नी को उठा मोटरसाइकिल से ले कर थाना ले कर आया वहा पुलिस हमें देखते ही बोला की आपको हॉस्पिटल जाना चाहिए था यहाँ क्यों आ गया, हम बोले सर जिस समय ईटा पत्थर चल रहा था उस समय हम आपको बताये तो आप नहीं आये अब ये हाल हो गया मेरा घर वाला भी आपके दरवाजे पर आया परन्तु आप नहीं सुने, हर पल का रिपोर्ट आपको दे रहे थे परन्तु आपने कोई एक्शन नहीं लिया, जिसके बाद पुलिस अपने गाडी से ले कर हमें और मेरी पत्नी को रेफरल अस्पताल डोमचांच लाया जहा पर प्राथमिक उपचार में मेरे सर पर 11 टाका लगा मेरी पत्नी को 22 टाके लगे जिसके बाद हमें और मेरी पत्नी को सदर कोडरमा भेज दिया गया, मेरे पिता जी और माँ वही पड़े रहे, उन्हें वहा से एम्बुलेंस से कोडरमा सदर ले जाया गया, वहा हमें भर्ती नहीं लिया, जिसके बाद हम पूरा परिवार पुलिस अधीक्षक के पास गए वहा पर बताये तब इंस्पेक्टर को फोन किया गया फिर हमें सदर भेज दिया गया जहा पर, पिता जी को 8 टाका लगा इस तरह हम घर वाले पूरी तरह बर्बाद हो गए थे, पुलिस हमें इंजोरी काट कर नहीं दिया था, उसी दिन शाम को इंस्पेक्टर साहब हमें और मेरे पुरे परिवार को सदर में बोले की आपलोग डोमचांच थाना आइये, हमलोग आने के हालत में नहीं थे फिर भी हिम्मत कर के डोमचांच थाना आये जहा पर नवलशाही थाना के बड़ा बाबु और विजय सिंह पुलिस भी था वहा पर हमसे पूछ ताछ किया गया, हम पूरा घटना बताये पुलिस बोला की आपके साथ बड़ा गलत हुआ जिसके बाद पुलिस हमसे आवेदन लिख कर माँगा, हम बोले सर हम अभी लिखने नहीं जानते है आप हमें वक्त दीजिए हम लिख कर देंगे, परन्तु इंस्पेक्टर मेरे ऊपर जबरन दबाव बना कर हमसे थाना में आवेदन लिखवाया, हम फिर भी बोले सर किसी मुंसी से लिखवा दीजिए हम तो सारा चीज बता रहे है परन्तु पुलिस इसके लिए तैयार नहीं हुआ, जिसके बाद एक रफ पेपर पर मुंसी चार लाइन लिख कर दिया जिसे देख कर मेरा भाई बिरेन्द्र साव उतार कर दे दिया, वह भी बोला की हम नहीं लिख पाएंगे परन्तु उसे भी जबरन पुलिस अपने सामने ही बैठ कर उसी तरह लिखवाया जिस तरह वह लिख कर दिया था, मेरा भाई लिख कर दे दिया, उस समाया हमें लग रहा था की हमें कब इंसाफ मिलेगा ? हम तो उसे बस पूछने गए थे परन्तु वह मेरे ऊपर हमला कर दिया, हमें लग रहा था की घर का पडोसी ऐसा कैसे कर सकता है हम यही सब सोच कर परेशान हो रहे थे, सदर अस्पताल में 8 दिनों तक भर्ती रहे उस समाय मेरे ससुराल के लोग हमें मदद कर रहे थे, इलाज के बाद हमें और मेरे परिवार वालो को छुटी मिला, जिसके बाद हम थाना गया तो थाना में हमसे गवाह माँगा गया हम गवाह दिए फिर भी पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की बाद में हमें पता चला की मेरे ऊपर भी चोरी का केस दर्ज हो गया है, और उन लोगो में किसी की गिरफ़्तारी भी नहीं हुई हम पुलिस को पूछे की सर उन लोगो का गिरफ़्तारी क्यों नहीं हुआ तो पुलिस बोला की तुम गिरफ्तारी में क्यों पड़े हो पहले अपना बेल करवाओ उसके बाद कार्यवाही होगीI जिसके बाद हम थाना से निराश हो कर घर चले आये, मेर पत्नी आज भी चल फिर नहीं पा रही है, घर में कोई काम नहीं हो रहा है, घर का खाना भी दुसरे घर से हमें मिल रहा है, और मेरे खिलाफ पुरे गाँव में यह प्रचार किया जा रहा है की उसको बोलो जमीन छोड़ देगा नहीं तो एक बार माथा फाड़ कर मारे है अबर तो खत्म ही कर देंगे, देखेंगे कौन क्या करेगा? इतना मारे तो अन्दर नहीं गए अब कैसे जायेंगे मेरा कुछ नहीं होगा ?अब हमें समझ में नहीं आ रहा की कहा इंसाफ मांगे और कहा फरियाद करे इस घटना की जानकारी कोडरमा पुलिस अधीक्षक मुख्यमंत्री और अन्य आला अधिकारियो को भी दिए परन्तु कही से कुछ नहीं हुआ है हम और मेरा पूरा परिवार डरे हुए है हमें लग रहा है की हम गाँव छोड़ दे क्योकि पुलिस भी मेरा नहीं सुनता है |

 हम चाहते है की मेरे मामले में न्यायिक कार्यवाही हो और पुलिस दोषियों पर कार्यवाही करे!







Monday, 14 June 2021

There is no need to application in case of murder, we will do everything by the police

My name is Jagdish Yadav age - 58 years, father Late Hardayal Yadav Village - Buchai, Post - Kapka, Thana - Barkattha, District - Hazaribagh I am a native of Jharkhand, I am doing farming to support my family and children.

 

Two years ago my son Santosh had bought a car for two lakh sixty thousand rupees from Prakash Yadav son Shri Etwari Yadav Nivasi Village Ghorbandha Panchayat Salaidih Police Station- Chalakusa District Hazaribagh Boloro, in exchange for which he had given fifty thousand rupees and to pay the rest of the money later. Resignation was done but after three days my son returned the car because he did not like the car.

 

My son gave the car back to him after three days and said we do not like the car, Prakash returned thirty thousand rupees immediately and asked to give twenty thousand rupees later, my son kept asking for money again and again but Prakash Yadav returned not given

 

On 5th April 2020 at 6 o'clock in the evening, my son went to Prakash Yadav's house to ask for money on his motorcycle, where both of them were heard, after which Prakash Yadav killed my son a lot by tying him with a rope to an electric pole. There was a lot of crowd due to the scream of the son.

 

After a while, in front of the village headman and other dignitaries, agreeing that on April 15, 2020, the panchayat will be done, you will get the money. After listening to those people, my son came back.

 

On 12 April 2020, on Santosh's mobile number 9262789788] 6205184557, at around 9 to 10 in the morning, Balo Singh Age - about 30 years, Father - Karu Singh alias Ramesh Singh, and Saryu Singh (Parachner) Age - about 35 years Father Jorbali Singh Village Khaira Panchayat Tuiyo Thana Barkatha called today for cock party. After hanging up the phone, Santosh went away.

 

 

We searched a lot till evening but could not find any satisfaction anywhere. His mobile was also turning off. We found out by calling his friend Umesh Yadav, father Bhuneshwar Yadav, village Chandgarh Panchayat, Bedokla police station, Barkatha district, Hazaribagh, and came to know that after taking 4 bottles of liquor from him, he went to Balo Singh's place. After which we went to ask Balo Singh also, he accepted that yes he had come to my place. There is no information after that. We also called the police station and gave information, but the police station also told that there is no information about Santosh.

 

On April 13, 2020, at 10 o'clock, Khaira village resident Saryu Singh informed the village chief Dashrath Yadav that Santosh's body was lying in the forest. As soon as he got the news, he came running. Santosh's body was taken into custody by the police and his car was also recovered.

 

When the police brought the dead body home after conducting a post-mortem. Police are interrogating us only after the delivery. A mountain of trouble had fallen on me at this time. Were tired of searching the son since yesterday morning. We all had lost our senses by crying. When the police saw that we were not able to tell anything, then she left.

 

After performing the last rites of the son, we went to the police station after taking the application on the second day. The police present there refused to take the application for the FIR, saying that there is no need for the application. We will do everything My soul is torn by this behavior of the police. My heart is saying that the police has bowed down in front of that mafia Prakash Yadav. He is being called Ji Hujuri. What happened after that, we do not know anything, now I have nothing left except to cry for the rest of my life.

 

I want that justice should be given to us by taking legal action against the guilty police personnel in this case.

Sunday, 9 May 2021

Is it a crime to ask for paper?

 I am Abdul Rahim Ansari, age 34, father of Ibrahim Ansari, a resident of Village Nawadih, Domchanch Police Station Domchanch. All the people in my family work as laborers. I also help them by working as laborers. Was at home at the time of lock down.

 

A mountain of sorrow broke over my family when we came to know that my brother-in-law had come to meet me at my house before the lock down. But after the lock down, some people of the village also gave the name of my brother-in-law to Sahia didi, we did not have any information about this.

 

After a few days, my brother-in-law got a call from the police station, from there the policeman said that come to the police station and get bail. Your name has also come under lock down violation. On this, my brother-in-law said that during the lock-down, we were in the house, the police did not listen to even one of them. My brother-in-law came to my house.

 

We reached the Domchan police station with our brother-in-law. S.I present in the police station told us that some money will have to be paid to get the bail done. We said that. The business was closed all in the lock down. You will get money from where whatever was left over has also been spent in food. Right now, people are spending money by borrowing from people. We folded our hands and asked them to make it Saheb. We will come after a few days and give that amount. He said that we will get the money only then we will get the bail. Frustrated, we came back home. We were upset in arranging the money, then someone told that there is no money in the police station. We breathed a sigh of relief. At the same time. My brother-in-law's grandmother had passed away. He went to his village for the last rites of his grandmother.

 

He was also called by the police there. While abusing the phone, he said that come to the police station now. My brother-in-law immediately came to my house. They came. Told me, brother, get ready, we have to go to the police station, both of us had a small amount of money for the police station.

 

The little Babu, sitting inside the Domchancha police station, asked the names of the two of us. He said that Bell is needed. I said yes, then they asked for money. After withdrawing all the money we had, he said that it is okay to go now. With a soldier, he drove us out. I dared to ask that sir, give me a slip or a bell paper so that we would know that his ox is gone.

 

They did not give any paper to us, instead they started abusing them and said that they are recording. Nobody was recording. They forcibly snatched my phone from the pocket above me. They bungled me and my brother-in-law to steal from the top. They formatted my phone. They made me and my brother-in-law worthy of worship. Moved inside and placed it. I sat there and wondered what the paper was about. Asking is a crime. The police made me stand upside down and hit my backyard with a lot of sticks. At the time of beating, he was saying that this is what we are. Inaugurate the beating today. After that, he gave me red as well. Hit and threatened that after today, whatever will be the case of theft in Domchang, you will be implicated in it.

 

After this, he hit me again and asked for money from us. The police present there asked us for money. I had 600 rupees, I gave it to them for fear of being killed. On the same day late at around 10 o'clock, they left both of us. We were just leaving the Hajat, then he again threatened us that it would not be good if we told this incident to someone. We have cleaned our hands a little bit.

 

In this incident, I have been broken from inside. Now scared to go out. We were relieved after telling you what we said.

Sunday, 5 July 2020

पुलिस घर से उठा ले गई और पैर तोड़ कर सदर में भारती कर दिया, बताया भी नहीं मेरा अपराध क्या था ?



मै शंकर साव पिता उम्र 32 श्री लक्ष्मण साव ग्राम तीन तारा पोस्ट कोडरमा जिला कोडरमा राज्य झारखण्ड का मूल निवासी हु!

मेरे परिवार में मेरे मेरी पत्नी के साथ मेरे 2 बच्चे लड़का के साथ भरा पूरा परिवार है! हम कोडरमा चौक पर फल का गुमटी लगाते है और किसी तरह अपने परिवार का जीविका चलाते है!

मेरी घटना यह है 28 जनवरी को शाम में मेरे दोस्त लोग हमें घर छोड़ दिए थे! मूर्ति विसर्जन के बाद  और घर आने के बाद हम खाना खाने बैठे ही थे  की तभी पुलिस की एक गाडी मेरे घर आया हम एक ही रोटी खाए और हाथ धो कर पुलिस के साथ चल दिए वो लोग हमें कोडरमा थाना ले गया वहा उतरने के बाद वो लोग के अलाव में हाथ सेकने लगा और हम बाथरुम के लिए गए उसके बाद हमको कुछ होश नहीं की मेरे साथ क्या हुआ?

 अचानक हमको कोडरमा सादर अस्पताल में दुसरे दिन 7 बजे सुबह हमको होश आया तो मेरे बगल में एक चौकीदार बैठा हुआ था! हम पेशाब जाने के लिए उठने लगे तो बहुत जोर से पैर में दर्द हुआ उसके बाद फिर हमारे सीने में भी दर्द महसूस हुआ! और पुरे शारीर में दर्द होने लगा उसके बाद हम उससे पूछे की हम यहाँ कैसे आये! इस बात पर वो बोला की तुम हमसे मिलने आ रहा था इस बिच तुम नाली में गिर गया! हम भी सोचने लगे की हम नशा में थे तो अगर कही गिर जायेंगे तो पूरा शारीर में दर्द कैसे हो जायेगा? फिर हम परेशान हो गए! कुछ देर बाद मेरे मम्मी पापा लोग अस्पताल पहुचे तब तक चौकीदार वहा से फरार हो गया था किसी पुलिस वाले ने हमें देखने नहीं गया! जब सदर अस्पताल में एक्सरे करवाने गए तो वहा का मशीन ख़राब था जिस कारन हमारा एक्सरे नहीं हुआ! उसके बाद सदर अस्पताल से पर्ची कटवा लिए और कोडरमा के निजी क्लिनिक में इलाज करवाने जाने लगे तो पापा के पास पैसा नहीं था घर में सबका रो रो कर बुरा हाल था यह सब देख कर मेरा भी आत्मा फट गया और हम दिल ही दिल में रोने लगे पापा पैसा के जुगाड़ में चले गए मेरी पत्नी को होश ही नहीं था की क्या हुआ वो हर बार एक ही बात बोल रही थी मेरा पति निर्दोष है वो कुछ नहीं किया है! पापा किसी तरह 20,000 रुपया कर्ज कर के हमें निजी क्लिनिक में भर्ती कराये जहा से ईलाज होने के बाद हमें दुसरे दिन धनबाद रेफर कर दिया गया जहा मेरा इलाज 15 दिन बाद हुआ मेरी माँ मेरे साथ रही उन 15 दिनों में माँ के ऊपर मुसीबत का पहाड़ टूट गया था! वो बार बार रोने लगती थी! उनका भी तबियत ख़राब हो गया था! पर क्या कर सकते थे माँ को बस यही बोल कर हिम्मत देते थे की क्या करोगी जो होना था हो गया अब क्या करे! इस तरह 15 दिन तक माँ भी खाना पीना छोड़ कर मेरे सेवा में लगी रही!

कुछ दिन बाद हमको पता चला की मेरे गाँव में एक आदमी का हत्या हो गया था उसी मामले में पूछ ताछ के लिए ले गया था! पर हम बार बार यही ख्याल आ रहा है की आखिर पुलिस मेरे साथ ऐसा क्या पुच ताछ किया की हम अस्पताल में चले गए!

हम चाहते है की मेरे साथ इस तरह की घटना घटी उसके लिए जिम्मेवार कौन है और हमें जब पुलिस घर से ले गई तो हमें सुरक्षित घर क्यों नहीं छोड़ा! 

हम चाहते है इस मामले में हमें न्याय मिले और जो भी दोषी हो उस पर कौनी कार्यवाही की जाए!



                                                   

जब भी पुलिस के पास जाता हूँ वह बहाना बना देती है!


मै संजय साव हूँ मेरी उम्र 35 वर्ष है  मेरे पिता दासो साव है मै ग्राम – बिघा, पोस्ट – फुलवरिया, थाना – नवलशाही, जिला – कोडरमा का मूल निवासी हूँ 
मेरी घटना यह है की मेरा गोतिया कैलाश साव पिता छोटी साव जिससे छ: महीने पहले जमीन जिसका खाता सं० (79) प्लाट सं० (113) है  जो खतियान में मेरे दादा स्व० बलकरण नायक के नाम से दर्ज है  जिसमे मेरा और मेरे गोतिया का बराबर का हिस्सा है  जब मेरा गोतिया उस जमीन पर घर बनाने लगा तो हम उस जमीन पर बटवारे का फैसला बैठाये, कैलाश साव जमीन का बटवारा बराबर के हिस्से में नही देना चाह रहा था  वह जमीन का पिछला हिस्सा मुझे दे  रहा था  मैंने गोतिया से कहा की आगे से पीछे बराबर का हिस्सा हमे दीजिये इस पर वह तैयार नही हुआ तो हमे कानून का सहारा लेना पड़ा  उस जमीन पर 144 की धारा लगी थी फिर भी वो लोग जबरन उस जमीन पर घर बनवाने लगे | 25 मई 2018 को मेरे पिताजी जब उन लोगो से मना करने गये की बटवारा होने के बाद घर बनवाना तो कैलाश, छोटी साव, सुशांत साव और पत्नी पिंकी देवी जो मेरे पिताजी को डंडे से बुरी तरह मानने लगे जब वो चिल्लाने लगे उनकी आवाज सुनकर मेरी बहन सरिता देवी जो ससुराल में परेशानी रहने के कारण यही रहती है | वो दौडकर उन्हें बचाने आयी उन सभी ने मिलकर मेरी बहन की भी जमकर पिटाई की उसका एक हाथ तोड़ दिया जब यह घटना घटी हम लोग वहा नही थे | यह सारी बाते मेरी माँ ने मुझे फ़ोन पर बतायी यह सुनकर मै जल्दी वहा गया तो मेरे पिताजी बेहोश पड़े थे मेरी बहन उनका हाथ पकड़कर रो रही थी यह देखकर मै घबरा गया की कही मेरे पिताजी को कुछ हो तो नही गया हमे उस समय बहुत तेज गुस्सा भी आ रहा था |
मै उस समय अपने को सम्भालते हुए जैसे उनको उठाने के लिए झुका वह लोग मुझे पकड़कर बारी – बारी डंडे से मारने लगे मेरे सिर पर कैलाश साव ने पीछे से धारदार हथियार से वॉर किया जिससे मेरा माथा दो जगह फट गया उस समय मेरी आँखों के सामने अँधेरा छा गया और मै बेहोस हो गया | मुझे कुछ देर बाद जब होस आया तो मेरे चारो ओर खून फैला हुआ था उस समय सभी खड़े हो कर तमाशा देख रहे थे हिम्मत कर किसी तरह मै पिता को लेकर खून
 से लतफथ नवलशाही थाने गये पुलिस को घटना की सारी जानकारी दी गयी वहा से पुलिस ने मेडिकल के लिए फुलवरिया उप स्वास्थ्य केंद्र के लिए एक चौकीदार हमे ले कर गया वह डॉक्टर नही मिला फिर हमे डोमचाच के अस्पताल में ले जाया गया वहा पर डॉक्टर पी मिश्रा बोले की यह का इन्जोरी नही कटा है इसलिए हम इलाज नही करेगे हम लोग खून से लतफथ दर्द से कराह रहे थे | 
उस समय हमे बहुत तकलीफ हुई की मै अपने बाप का इलाज भी नही करा पा रहा हूँ | जब डॉक्टर और पुलिस में बात हुआ तब हमारा इलाज हुआ |वहा से इलाज के बाद हमे फुलवरिया ले जाया गया वहा न के सफाई कर्मी ने मेरी पट्टी खोलकर फिर से वही पट्टी बांध दिया उसके बाद हम लोग को पुलिस थाने ले आयी और वहा से हमे यह कहकर घर भेज दिया आप लोग शाम को आइयेगा और जब हम लोग घर आये तो देखे की यहा पर उन लोगो ने मेरे माँ बहन को फिर इतनी बुरी तरह मारा की वह बेहोश हो गयी यह देख घबरा कर मै उन्हें थाने ले गया वहा से उन्हें मेडिकल कराने के लिए भेजा गया लेकिन कोई उपचार न मेडिकल मुआवना नही हुआ मै थक हार के वापस घर चला आया उन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही हुई | जब भी पुलिस के पास जाता हूँ तो वह बहाना बना देती है हम लोगो से ठीक तरह से बात नही करती है | आज भी वह लोग धमकी देते है फिर से मारेंगे देखते है क्या करोगे | दिन रात चिंता लगी रहती है कही जाता हूँ तो घर की चिंता लगी रहती है हमेशा जी घबराता है |डर बना रहता है क्या करू कुछ समझ में नही आ रहा है | जब से यह घटना हुई है पेट भर खाना नसीब नही हुआ है पूरी नीद सो भी नही पाया हूँ |
   मै चाहता हूँ जिन लोगो ने मेरे साथ ऐसा किया है उनके खिलाफ कार्यवाही की जाय और हमे हमारा हक मिले |

बेटी के साथ हुए छेड छाड मामले में थाने में प्राथमिकी कराने गई महिला को पुलिस ने कहा: चली आती है थाना जैसे बाबा का दरबार है।



मै शोभा देवी उम्र 35 पति स्व0 अनिल मिश्रा ग्राम नयाटांड पोस्ट कोडरमा थाना कोडरमा जिला झारखण्ड की मूल निवासी हू। मै और मेरा परिवार खुला मैदान मे तम्बू (प्लास्टिक का झोपडी) बना कर रहते है। और गुजर बसर के लिए चुडी, और मनिहारी सामान गाॅव गाॅव जा कर बेचते है। मै और मेरा परिवार पिछले 40 साालों से कोडरमा में रह कर यह काम कर रहे है।
मेरे साथ घटना यह घटी कि 26 नवम्बर की षाम 3 बजे मेरी बेटी उमा (काल्पनिक नाम ) उम्र 13 वर्ष  चुडी बेच कर आ रही थी। उसके रास्ते मे पहले से ताक लगाये बैठे छोटू उर्फ कोका पिता नन्हका मियाॅ ग्राम जलवाबाद हेठ टोला वार्ड नम्बर 11 का था जो मेरी बेटी को छेडने की कोशिश किया और अपषब्द बोले तो मेरी बेटी जल्दी से भाग कर आई और हमको कह सुनाई। हम गरिब लोग कुछ बोलने नही गये। कुछ देर बाद 6 बजे षाम को मेरी बेटी टट्टी षौच कार्य के लिए गई तो उस लडके ने झाडी से निकल कर उसको जोर से पकड लिया और उसके बदन के कपडे फाड कर उसे पटक दिया वो जोर से चिल्लाई उसका आवाज सुन कर हम और मेरे आस पडोस के लोग तुरंत दौड कर वहाॅ गये तो उस लडके के साथ हाथा पाई हो गया। उस लडके ने और लोगों को बुला लिया उसके बाद उन लागों ने हमलोगों को पटक पटक कर बहुत मारा मै खुब चिल्ला रही थी कोई बचाने वाला नही था लोग खडा हो कर देख रहे थे। अषोक मिश्रा उर्फ बिठला ने धारदार हथियार से मेरे माथा पर मारा जिससे मेरा माथा फट कर पुरा जोर से खुन बाहर आने लगा हम धबरा गये हमे लगने लगा कि अब हम नही बचेगें। मेरी बेटी मनिषा हमको देख कर जोर जोर से चिल्ला चिल्ला कर रोने लगी। फिर हम थाना गये तो थाने वाले पुलिस ने यह कह कर भगा दिया कि ये लोग खुद मार पीट कर थाना चले आते है। जैसे बाबा का दरबार है। कुछ नही हुआ है ये लोग झुठ बोल रहे है। हम बोलते रहे कि सर लडका लोग मेरी बेटी को छेडा और रेप करने की कोषिष की पर किसी ने मेरी एक नही सुनी। अंत मे निराष हो कर लौट रहे थे रास्ते मे निरा दीदी का घर दिखा तो वहाॅ मिलना चाहे पर वो नही थी फिर फोन पर बात हुआ तो उसके आदमी हमको थाना ले कर गये और केस करवा दिये। पर वो लोग थ्या लिखा क्या नही हमको कुछ पता नही। वो लडका लोग को पुलिस ले कर थाना आया था फिर मेरे साथ मे ही वो लोग को भी छोड दिया। दुसरे दिन वो लोग 8 से 10 लोग आये और मेरे साथ साथ और भी मेरे जैसे जितने रहने वाले थे सभी का झोपडी लाठी डंटा और टाॅगी से तोड फोड कर उजाड दिये कुल चार परिवार के 18 लागों को उन लोगों ने बेघर कर दिया हम लोग उन लागों के पैर पकडे कि हमें यहाॅ से नही भगाईये पर उनलागों ने बोला कि हमारे महलले मे रह कर हमारे लडके लोगों को बदनाम करेगी भागो यहाॅ से। अंत में हमलागों को भागना पडा। अभी वहाॅ से कुछ दूरी पर रह रहे है। पर वो लोग मार परट करने की घमकी देता है। और पुलिस मेरी बेटी के साथ हुए छेड छाड और मार पीट पर कोर्द कार्य वाही नही कर रही है।
हमलागों का डर से बुरा हाल है। कि कब जाने वो लोग क्या कर देगे? हम चाहते है। कि पुलिस मेरे मामले मे जाॅच पडताल कर के दोषियों के उपर कडी कार्यवाही कर हमें न्याय दे। क्या हमलोगांे के लिए कानून नही बना है। जो पुलिस इस तरह हमे थाना से भगा देती है। एैसे पुलिस वाले पर भी कानून कार्यवाही करे ताकि आाने वाले किसी गरीब को थाने मे ईज्जत से बात करे और उसके दर्द को पुलिस समझे। इसके सिवा हमको कुछ नही चाहिए। 
आप लोग मेरी बात सुन रहे है। हमें लग रहा है कि अब हमें न्याय मिलेगा। ईस तरह किसी ने मेरी बात नही सुनी अगर पुलिस वाले सुनते तो हमें कब का न्याय मिल जाता। 


पैसा ले कर मुख्य आरोपी का नाम हटा: पैसे का रखैल बन गया पुलिस



मै  सुमन कुमार ( काल्पनिक नाम ) पिता स्व0 (रामू  प्रसाद) काल्पनिक नाम  ग्राम गिरीडीह रोड डोमचाॅच कोडरमा झारखण्ड का मूल निवासी हू।
छः सदस्यों का मेरा परिवार पुरी तरह खुषहाल था मेरा अपना राशन का दुकान है। जिसमे मै दिन रात मेंहनत करता हु। इसी से मेरा परिवार का अजीविका चलता है।! अचानक 9 मई 2015 को मेरे दुकान के सामने एक सडक दुर्धटना हुआ।! एक बाईक पर पुरा परिवार पति पत्नी और बच्चे जा रहे थे विपरित दिशा से आ रहे दस चक्का ट्रक की चपेट मे आने से महीला की मौत हो गई। मै देखा तो अपने घर से कपडा ले जा कर महिला के उपर डाल दिया! और अपने दुकान में आ कर काम करने लगें कुछ ही धंटों में वहाॅ इतना भीड लग गया और हमें लगा कि माहौल खराब हो सकता है। तो हम दुकान बंद कर के घर के काम में हाॅथ बटाने चले गये।! प्ुलिस मेरे घर के पास आई तो हम उसे बैठने के लिए कुर्सी दिये और पानी पीलाये और जहाॅ तक हमसे हो सका हम पुलिस को मदद किये! क्योकि मेरे परिवार के लोग भी पुलिस में थे तो बताते थे कि उन्हे किस तरह से कानून के लिए काम करना पडता है। इस लिए हम उन्हे पुरा मदद किये! मेरे पेडोस के लोग भी पुलिस के मदद किये पुलिस रात 2 बजे तक काम किया और फिर चला गया
दुसरे दिन पास पडोस के लोगों से हमें पता चला कि हमारे उपर केस हो गया है।! यह सुन कर तो मेरे पैर तले जमीन खिसक गई हमें बहुत तकलीफ हुआ इस बात का कि पुलिस को पुरा रात सर सर कर उनको पानी पिलाये बैठने को दिये और जहाॅ तक हुआ पुरा मदद किये जिसका ये सिला मिला ईस तरह होने लगे तो मै क्या कोई भी कानून का मदद करने से डरेगा ! तब से मै काफी विचलित रहने लगा था। घर परिवार में बच्चे और पत्नी बहुत परेषान रहने लगी थी और हम अपने परिवार की चिंता को देखते हुए मुखिया वार्ड सदस्य स ेले कर मंत्री तक हाॅथ जोडे और पुरा मामला सुनाये सबने मदद करने की बात कही पर किसी ने मेरा मदद नही किया! पर सभी ने कहा कि पुलिस आनके साथ गलत किया है। इस 10 से 15 दिन में मेरा काफी नुकषान हुआ था दुकान बंद होने के कारण घर में खाने की समस्या तक आ गई थी और हम कर्ज में डुब गये! हम पुरी तरह हताष हो गये थे मेरा हिम्मत नही काम कर रहा था।! टाज तक मेरे उपर किसी भी तरहा का कोई अपराधिक मुकदमा नही था और पुलिस जान बुझ कर हमें फंसा रही थी।।! मेरे अलावे 17 और लोगों का नाम था इस केस में जो बडे पंुजीपति थे और पुरी घटना का जो मुख्य आरोपी दीपक कुमार अग्रवाल जो काफी पैसा वाला है। पुलिस उससे पैसा लेकर उस पर लगे सभी धारा को हटा कर इस केस से उसे मुक्त कर दिया! जब हमें यह पता चला तो लगा कि कानून और पुलिस पैसे का रखैल बन गया है।! इस देष में गरिब को न्याय के लिए कोइ जगह नही है।! जहाॅ पैसा है वहाॅ सबकुछ होता है।! उसके बाद हमें लगा कि पुलिस से हमें मिलना चाहिए यह सोंच कर हम एक दिन डोमचाॅच थाना गये और थाना के बडा बाबु सुधीर कुमार पोद्दार का पैर पकड कर खुब रोये और बोले कर आपको पानी पिलाना ही मेरा दोश है। और हमने कोइ दोश नही किया है! ळम तो आपको मदद किये और आप मेरे साथ इतना बुरा किजिएगा ऐ हमें पता नही था! जे मामले में मुख्य आरोपी था उसका नाम हटा दिये और मेरा रहने दिये! थाना प्रभारी हमको देखा और बोला ठीक है रो मतह म तुम्हे मदद करेगें हम जानते है तुम गलती नही किये हो पर कानून होता है। ना! वे ऐसे बोला मानो मेरा भगवान आज सामने प्रकट हो कर ये वरदान दे रहे हो हमको एैसा लग रहा था मेरा दिल का बोझ कुछ हल्का लग रहा था।  हम घर आये और बच्चों व परिवार को बताये तो उनलोगों के हलक से खाना उतरा और उस दिन मेरा परिवार ठीक से खाना ख पाया था यह देख कर हमें थोडा खुषी हुआ पर दिल में डर बना हुआ था।!
ईसके बाद हम थाना के आई0 ओ0 महेन्द्र यादव से बात किये तो वो बोला कि आप इस केष में किसी भी रुप में दोशी नही है। और  आप पर कोइ कार्यवाही नही होगा इसी बीच वो ट्रांसफर हो गया उसके बाद वो रिटायर हो गया! दुसरा आई0 ओ0 ने फिर हमें इस केस में फसा दिया ! इस तरह हम इस घटना सं पुरी तरह टुट गया हूॅ! टब हमें न्याय की उम्मीद नही दिख रही है।
इस घटना सं हमे न्याय चाहिए और कानून मुख्य आरोपी पर कानूनी कार्यवाही करे हम यही चाहते है। कि किसी गरिब का कानून के प्रति विष्वास न टूटे!